Tuesday, July 28, 2020

आंगनवाड़ी संगठनों ने दिया हड़ताल का नोटिस : who निर्देशों का पालन करते हुए 7 व 8 अगस्त को आंगनवाड़ी की हड़ताल और 9 अगस्त को सत्याग्रह,

                                        लॉक डाउन : वर्कर के उत्पीडन का सरकार को अवसर 

                                            उत्पीडन का प्रतिकार भी ज़ारी रहेगा  

7, 8 व् 9  अगस्त का अभियान सफल करो 


24 july को प्रदेश के प्रमुख केन्द्रीय ट्रेड यूनियन संघ  INTUC, AITUC, HMS, CITU ,in  ट्रेड यूनियन संघों से सम्बद्ध आंगनवाड़ी यूनियन कि एक वर्चुअल बैठक आयोजित कि गयी जिसकी अध्यक्षता गिरीश पाण्डेय तथा सञ्चालन वीना गुप्ता ने किया. बैठक में केन्द्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर 7 व्  8 को  हड़ताल तथा 9 को अंग्रेजों,भारत छोडो दिवस पर भारत बचाओ दिवस मनाने का निर्णय लिया गया. इस निर्णय के बाद चारों ही यूनियन कि तरफ से सरकार को हड़ताल का नोटिस भेज दिया गया. बैठक में aituc से चंद्रशेखर,intuc से दिलीप श्रीवास्तव और शिशिर शर्मा,citu से वीना गुप्ता और चमन आरा, hms से गिरिश पाण्डेय, माया सिंह  और सुनंदा तिवारी  उपस्थित थे. सरकार को अखिल भारतीय हड़ताल और 9 अगस्त को सत्याग्रह हेतु स्ट्राइक नोटिस की कोपी यहाँ प्रेषित की जा रही है.

                                                                      वीना गुप्ता  


                                                  हड़ताल का नोटिस 

सेवा में 
सचिव 
महिला एवं बाल विकास विभाग 
लखनऊ  (यू.पी.)
विषय :who निर्देशों का पालन करते हुए 7 व 8 अगस्त को आंगनवाड़ी की  हड़ताल और 9 अगस्त को सत्याग्रह का नोटिस 

महोदय

आपको सूचित किया जाता है कि निम्न हस्ताक्षर कर्ता  यूनियनों ने निम्न लिखित मांगों पर  केंद्रीय ट्रेड यूनियन संघों इंटक एटक सीटू और एचएमएस द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सात एवं आठ अगस्त को अखिल भारतीय हड़ताल में भागीदारी करने का फैसला लिया है। डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित सभी मापदंडों एवं शारीरिक दूरी का पालन करते हुए हम सभी इस हड़ताल में भागीदारी करेंगे और 9 अगस्त को , आजादी के आंदोलन के महत्वपूर्ण दिवस 9 अगस्त भारत छोड़ो दिवस को मनाएंगे।

हमारी मांगें

 कोविड 19 की पुष्टि होने वाले मामलों की संख्या में भारत की स्थिति को देखा जाए तो वर्तमान में एशिया में भारत में सबसे अधिक मामले हैं और दुनियाभर के मामलों में भारत चैथे नम्बर पर है। लेकिन अभी भी संतोषजनक बात यह है कि भारत में कोविड से मामले घातक होने की दर, वैश्विक दर से अपेक्षाकृत कम है। हम सभी जानते हैं कि यह हमारे चिकित्सा और स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के महान योगदान के कारण ही संभव हो पाया है।

कोविड 19 के सामुदायिक प्रसार को रोकने में मदद करने वाले फ्रंटलाइन वर्कर्स में योजनाकर्मी यानी स्कीम वर्कर्स सबसे आगे हैं। इन श्रमिकों में 60 लाख महिला मजदूर है, इन श्रमिकों में 10 लाख आशा वर्कर्स और फैसिलिटेटर्स हैं, जो घर-घर जाकर सर्वे करते हैं, लोगों को शिक्षित करते हैं और क्वॉरेंटाइन केंद्रों में लोगों की देखभाल करते हैं इनमें करीब 26 लाख आंगनवाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स हैं, जो आईसीडीएस के तहत काम करते हैं और आशा वर्कर्स के समान ड्यूटी कर रहे हैं इसके साथ-साथ आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स  लाभार्थियों को घर-घर जाकर पोषाहार बांट रहे हैं, योजना श्रमिकों का एक और हिस्सा करीब 27 लाख मिड डे मील वर्कर्स हैं जो स्कूल जाने वाले बच्चों को घर-घर राशन पहंुचा रहे हैं और सामुदायिक केंद्रों और क्वारंटाइन केंद्रों में भी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। इन श्रमिकों में 108 एंबुलेंस वर्कर्स समेत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। यह सभी वर्कर्स अपने और अपने परिवारों के जीवन को दांव पर लगाकर समुदाय में ज़मीनी स्तर पर काम में जुटे हुए हैं।

बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि इनमें से अधिकतर को किसी भी प्रकार के सुरक्षात्मक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, इन्हें मास्क व सैनिटाइजर तक भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इनमें से बहुत से श्रमिकों को कोरोना कैरियर यानी कोरोना के वाहक कहकर उन पर हमले किए जा रहे हैं। योजना श्रमिकों के कोविड-19 से संक्रमित होने की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। कोविड-19 से संक्रमित बहुत से योजना श्रमिकों के लिए इलाज करावाना भी मुश्किल हो रहा है अस्पतालों की तो बात ही क्या कहें। बहुत से ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें आशा वर्कर्स, आंगनवाड़ी वर्कर्स, मिड डे मील वर्कर्स व अन्य योजना श्रमिकों की कोविड से संक्रमित होने के कारण मौतें भी हुई है। बहुत से मामलों में इनके कोविड-19 के टेस्ट भी नहीं किए गए और इन्हें आपकी सरकार द्वारा घोषित बीमा की राशि भी नहीं मिली। इसके अलावा  बीमा में वर्कर्स के अस्पताल में भर्ती होने और क्वारेंटाइन के खर्चे भी शामिल नहीं है, इन खर्चों को वर्कर्स को अपनी जेब से करना पड़ रहा है।

जैसा कि आपने कई बार अपने भाषणों में उल्लेख किया है, योजना श्रमिकों द्वारा प्रदान की गई सेवाएं अति महत्वपूर्ण हैं। लेकिन, संसदीय स्थायी समितियों और 45 वें और 46 वें भारतीय श्रम सम्मेलन सहित विभिन्न मंचों की सिफारिशों के बावजूद इन श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को कभी भी किसी भी स्तर पर ध्यान में नहीं रखा गया है। इन्हें मजदूर के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है और न्यूनतम मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया जाता। वर्षों की सेवा के बाद भी इनके लिए कोई सामाजिक सुरक्षा या पेंशन नहीं है। यहां तक कि मिड डे मील श्रमिकों को मात्र 1000रू महीना मानदेय मिलता है लेकिन यह मामूली राशि भी इन्हें नियमित रूप से भुगतान नहीं की जा रही है। 

डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ जैसी विभिन्न एजेंसियों ने आने वाले समय में बड़े पैमाने पर गरीबी बढ़ने के कारण आजीविका की हानि, उचित सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा की कमी, और परिणामस्वरूप भूख और कुपोषण से होने वाली मौतों (छह महीने के भीतर पांच साल से कम उम्र के 3 लाख बच्चों की मौतों सहित!) की चेतावनी दी है। ऐसे में यह बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है कि सरकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित सेवाओं की योजनाओं को मजबूत करे और इन सेवाओं में कार्यरत योजना श्रमिकों के योगदान को मान्यता दे। 

हम यह भली भांति जानते है कि महामारी से लड़ने के लिए वित्तीय संसाधनों को जुटाना ज़रूरी है। 

हम आपसे आग्रह करते हैं कि राष्ट्रहित में दी जा रही सेवाओं के सर्वोपरि महत्व को देखते हुए आप तुरंत हस्तक्षेप करें और इन मुद्दों को हल करें।

हमारी मांगें 

1. सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स के लिए सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान करो, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में। नियंत्रण क्षेत्रों और रेड जोन में लगे हुए वर्कर्स के लिए पीपीई किट दो। सभी फ्रंटलाइन श्रमिकों की बार-बार, निरंतर और फ्री कोविड -19 टेस्ट किए जाएं।
2. सभी वर्कर हेल्पर को 50 लाख रुपये का बीमा कवर दो जिसमें ड्यूटी पर होने वाली सभी मौतों को कवर किया जाए। पूरे परिवार के लिए कोविड -19 के उपचार का भी कवरेज दिया जाए।
3. केंद्र प्रायोजित योजनाओं आईसीडीएस, एनएचएम और मिड डे मील स्कीम को पर्याप्त आर्थिक आवंटन कर स्थाई बनाओ। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए जीडीपी का 6 प्रतिशत आवंटित करो। 
4. 45वें व 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार योजना श्रमिकों को मजदूर के रूप में मान्यता दो, सभी योजना श्रमिकों को 21000 रू प्रतिमाह न्यूनतम वेतन दो, 10000रू प्रतिमाह पेंशन तथा  ईएसआई, पीएफ आदि प्रदान करो।
5. मौजूदा बीमा योजनाएं (ए) प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, (बी) प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और (सी) आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बीमा योजना - सभी योजनाओं को सभी योजना कर्मियों को कवर करते हुए सार्वभौमिक कवरेज के साथ ठीक से लागू किया जाए।
6. कोविड -19 ड्यूटी में लगे सभी कांट्रैक्ट व योजना श्रमिकों के लिए प्रति माह 10,000 रू का अतिरिक्त कोविद जोखिम भत्ता भुगतान किया जाए। सभी लंबित बकायों का भुगतान तुरंत किया जाए। 
7. ड्यूटी पर रहते हुए संक्रमित हुए सभी लोगों के लिए न्यूनतम दस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
8. 62 वर्ष की वर्कर्स को निकालना बन्द करो। ओडिशा राज्य की तर्ज पर सभी आंगनवाड़ी वर्कर व हेल्पर को  7500 रू0  प्रति माह पेंशन दो।
9. केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए बजट आवंटन बढ़ाया जाए। 
10. टैक्स के दायरे के बाहर के सभी लोगों को मुफ्त और पर्याप्त कोविड टेस्ट और उपचार की सुविधाएं प्रदान की जाएं। क्वारेंटाइन केंद्रों और अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित की जाए। 
11. लाभार्थियों के  लिए 7500 रुपये प्रति माह और ज़रूरतमंदों के लिए मुफ्त राशन/भोजन की व्यवस्था की जाए। सभी के लिए नौकरियां और आय सुनिश्चित किए जाएं। 
12. सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए। स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा सहित बुनियादी सेवाओं के निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लिया जाए।
13. भोजन के अधिकार और शिक्षा के अधिकार की तरह सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा के अधिकार के लिए कानून बनाया जाए।
14. वित्त जुटाने के लिए, ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ जैसी परियोजनाओं पर खर्चा बचाया जाए।  संसाधनों के लिए अति धनी वर्गों पर कर लगाया जाए।
                                                                                             भवदीय

            दिलीप श्रीवास्तव          चन्द्र शेखर                 गिरीश पाण्डेय             वीना गुप्ता 
               INTUC                 AITUC                  HMS                 CITU           



       

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