Saturday, March 7, 2020

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का संक्षिप्त इतिहास



 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का संक्षिप्त इतिहास

8 मार्च  की सबसे बड़ी विशेषता यह है वर्गीय दृष्टिकोण से लैस महिला कम्युनिस्ट साथियों के नेतृत्व में पितृसत्ता  सामंतवाद और पूंजीवाद से वर्ग संघर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में अस्तित्व में आया ।सामाजिक श्रम में महिलाओं की भागीदारी हेतु 8 घंटे काम का अधिकार, सुरक्षित कार्यस्थल, समान काम का समान वेतन, लैंगिक उत्पीड़न, भयंकर गरीबी और युद्ध के खिलाफ़ संघर्ष में यह महिलाएं मैदान में उतरी और इनके साथ बड़ी तादाद में महिलाओं ने भागीदारी की थी. युद्ध और हिंसा से मुक्त शांतिपूर्ण दुनिया भूख और गरीबी से मुक्त खुशहाल दुनिया, अन्याय और शोषण से मुक्त एक समाजवादी दुनिया बनाने के सपने ने  इस आंदोलन को ऊर्जा दी.  इन आंदोलनों का असर यह हुआ की महिलाओं की यूनियन गठित हुई व् अन्य यूनियनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने लगी और उनके बीच राजनीतिक चेतना में जबरदस्त वृद्धि हुई.
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास पर बात शुरू करने से पहले इसकी पृष्ठ भूमि  में घट रही कुछ घटनाओं को समझने की जरूरत है. 1800 ईसवी तक काम के घंटे दुनिया में कहीं भी निर्धारित नहीं थे. 1864 में इंग्लैंड जर्मनी फ्रांस पोलैंड और इटली के श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक लंदन में हुई इस बैठक में कार्ल मार्क्स भी शामिल हुए इस इस मीटिंग में इंटरनेशनल वर्किंग मेंस एसोसिएशन का गठन हुआ जिसे पहला इंटरनेशनल भी कहते हैं करीब 10 साल बाद इसका अंत हो गया हो गया और 1883 में कार्ल मार्क्स का भी निधन हो गया ।
हम सभी जानते हैं कि 1 मई 1886 को अमेरिका के मजदूरों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर संघर्ष शुरू किया आन्दोलन में गोली चली और कई मजदूर शहीद हो गए चार मजदूरों को अगले साल फांसी दे दी गई
1989 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल जिसे दूसरा इंटरनेशनल भी कहते हैं पेरिस में हुआ इसमें दुनिया भर से 900 प्रतिनिधि शामिल हुए जिसमें क्लारा जेटकिन, एलियोनोरा मार्क्स  और अगस्त बेबेल और प्लेखानोव जैसे कम्युनिस्ट नेता भी शामिल थे. इस सम्मेलन में क्लारा जेटकिन ने महिला मज़दूरों का सवाल उठाया और मजबूती के साथ महिला मजदूरों के अधिकारों और संघर्ष में उनकी भागीदारी की आवश्यकता की बात की इसका प्रभाव भी रहा कि कांग्रेस ने बिना किसी लैंगिक व राष्ट्रीयता राष्ट्रीयता के भेदभाव के महिला मजदूरों को साथ लेकर काम करने का आह्वान किया.
सोशलिस्ट इंटरनेशनल की चौथी बैठक 1896 में लंदन में हुई यहां पहली बार महिला प्रतिनिधियों ने अलग से बैठक की और समाजवादी महिला सम्मेलन आयोजित करने की संभावनाओं पर विचार किया.
पहला अंतरराष्ट्रीय सोशलिस्ट महिला सम्मेलन महिला सम्मेलन 17 अगस्त 1905. में स्टुटगार्ट में हुआ. उन दिनों वोट देने का अधिकार सारी जनता को नहीं था इसलिए वोट का अधिकार एक प्रमुख मुद्दा था. यहां हुए डिस्कशन बहुत दिलचस्प थे कि जहां पुरुष मजदूर पुरुषों के लिए वोट का अधिकार मांग रहे थे और कुछ महिलाएं भी इनके समर्थन में थी,  लेकिन सोशलिस्ट महिलाएं सभी के लिए वोट का अधिकार की मांग उठा रही थी. क्लारा जेटकिन अंतर्राष्ट्रीय महिला सचिवालय की सचिव चुनी गई चुनी गई जो पत्रिका इक्वलिटी वह निकालती थी उसे संगठन की अधिकारिक पत्रिका मान लिया गया.
26 से 27 अगस्त 1910 को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में सोशलिस्ट विमेन कॉन्फ्रेंस संपन्न हुई जिसमें 17 देशों की करीब 100 महिला प्रतिनिधियों ने भाग लिया इस सम्मेलन की अध्यक्षता क्लारा जेटकिन ने की. इस सम्मेलन में महिलाओं को वोट देने का अधिकार, मातृत्व बीमा, मां और बच्चे की सुरक्षा, और युद्ध के खिलाफ प्रस्ताव पास होने के साथ-साथ एक ऐतिहासिक प्रस्ताव महिला दिवस के बारे में भी पारित किया गया प्रतिनिधियों ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के प्रस्ताव को भारी उत्साह के साथ सर्वसम्मति से पारित किया गया
1911
में पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 19 मार्च दिन रविवार को ऑस्ट्रिया डेनमार्क जर्मनी और स्विट्जरलैंड में मनाया गया.
1912 में दूसरा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 12 मई रविवार को जर्मनी और स्वीडन सहित कई देशों में मनाया गया
1913
में 2 मार्च रविवार को महिला दिवस और भी अधिक उत्साह के साथ मनाया गया इस बार रूस में भी पहली बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया झार के तानाशाही शासन में भी भी पार्टी ने 2 मार्च 1913 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया. 1940 आते-आते विश्वयुद्ध के बादल दुनिया पर मंडराने लगे थे. रूस में प्रतिबंधों के बावजूद 8 मार्च बहुत उत्साह के साथ मनाया गया. लेकिन 4 माह बाद ही विश्व युद्ध शुरू हो गया. इंटरनेशनल के बहुत से देश अंधराष्ट्रवादी देशभक्त हो गए और और इंटरनेशनल बिखर गया 1915 में 7 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस स्विजरलैंड मनाया गया .क्लारा जेटकिन ने विश्व युद्ध में निष्पक्ष रहे देश स्विजरलैंड के बर्न शहर में 26 से 28 मार्च 1915 को सोशलिस्ट वूमेन इंटरनेशनल का सम्मेलन आयोजित किया इस कठिन समय में भी 8 देशों की 30 प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भागीदारी की जिसमें रूस से  भी साथीयों ने भाग लिया. प्रथम विश्व युद्ध ने सारी दुनिया के साथ-साथ रूस को बर्बाद को बर्बाद कर दिया  20 लाख  सैनिक और इतने ही बंदी मारे ग.ए देश गरीबी में डूब गया,ज़िंदगी बदतर होती जा रही थी. अब महिलाओं के सब्र का बांध टूट गया. 18 मार्च 1917 को महिलाएं जिनमें अधिकांश कपड़ा कारखानों में काम करती थी सड़कों पर निकल आए और हड़ताल कर दी.  इस दिन की खास की खास बात यह थी कि अभी तक महिला दिवस रविवार के दिन मनाया जाता था इस बार पहली बार बृहस्पतिवार को महिलाओं ने हड़ताल करके और विरोध प्रदर्शन करके इसे मनाया  इस प्रदर्शन का मुख्य नारा था रोटी और शांति सैकड़ों महिलाएं बच्चों को गोदी में लिए रोटी चाहिए, युद्ध खत्म करो, शांति की बहाली करो के नारे के साथ हाथों में तख्तियां लिए बड़ी तादाद में सड़कों पर उतरी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हड़ताल रूसी क्रांति की शुरुआत थी जिसे फरवरी क्रांति के नाम से भी जाना जाता है. रूस के जूलियन कैलेंडर के अनुसार (8 मार्च को 23 फरवरी की तिथि थी) 8 मार्च से शुरू हुए प्रदर्शनों में लगातार भागीदारी बढ़ती गई यह प्रदर्शन रुके नहीं और मजदूर वर्ग क्रांति की ओर बढ़ता गया. अंतत: 16 मार्च तक जार हथियार डाल चुका था यह ऐतिहासिक जीत थी.
तीसरा कम्युनिस्ट इंटरनेशनल जिसे कोमिन्टर्न भी कहते हैं, का गठन 1919 में हुआ और 1920 में इसकी दूसरी कांग्रेस में संपन्न हुई. कोमिन्टर्न की इस बैठक के साथ महिला कम्युनिस्टों का पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन इनेसा आर्मंड के नेतृत्व में हुआ. क्लारा जेटकिन को अंतरराष्ट्रीय सेक्रेटेरिएट  का सचिव चुना गया चुना गया .
 1921 में 9 जून से 15 जून तक मॉस्को में कम्युनिस्ट महिलाओं का दूसरा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया इस सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए 8 मार्च की तिथि को स्थाई रूप से दर्ज कर लिया. कमुनिस्ट विमेन इंटरनेशनल के मुखपत्र कम्युनिस्ट विमेन इंटरनेशनल के जनवरी-फरवरी 1922 के अंक में लिखा गया,” हम पूरी जिंदादिली से हमारी बुल्गारिया की महिला साथियों की इस प्रस्ताव का और साथ ही कम्युनिस्ट महिलाओं की मास्को में हुई दूसरे इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में लिए गए उस निर्णय में लिए गए उस निर्णय का स्वागत करते हैं जिसके अनुसार हर 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा वही दिन जिसे रूसी महिलाएं भी महिला दिवस के रूप में मनाती हैं. यह हमें 8 मार्च 1917 की याद दिलाता है जब पेट्रोग्राद में महिला मजदूरों ने शांति और आजादी की मांग को लेकर विशाल प्रदर्शन किया था और बाद में यही आंदोलन हमें रूसी क्रांति की ओर ले गया था.
1921 की कम्युनिस्ट विमेंस इंटरनेशनल कांफ्रेंस के निर्णय के बाद 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय कमलेश कैलेंडर में स्थाई रूप से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के नाम से दर्ज हो गया कम्युनिस्ट महिलाओं द्वारा महिला मुद्दों पर संघर्षों ने सारी दुनिया में महिला आंदोलनों की अलख जगा दी नारी मुक्ति आंदोलन विभिन्न संगठनों समूह और आंदोलन के साथ सभी विचारधाराओं में फैल गया
1945
में दुनिया भर की कम्युनिस्ट महिलाएं विमेंस इंटरनेशनल डेमोक्रेटिक फेडरेशन बनाने के लिए एकजुट हुई. 1971 में इंटरनेशनल डेमोक्रेटिक फेडरेशन की बर्लिन में हुई बैठक में जोर दिया गया कि महिलाओं के विकास के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष मनाया जाए. अगले साल यूनियन ऑफ ऑस्ट्रेलियन वूमेन के अध्यक्ष और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की केंद्रीय कमेटी की सदस्य फ्रेडा ब्राउन ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को पत्र लिखकर अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष मनाने और एक कन्वेंशन आयोजित करने का अनुरोध किया. 1975 में अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष का विश्व सम्मेलन मेक्सिको सिटी में हुआ. महिला सम्मेलन को देखते हुए 1975 के 8 मार्च को संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाया 2 साल बाद 1977 में संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा ने एक प्रस्ताव पारित करके सभी देशों को महिला दिवस मनाने के लिए आमंत्रित किया.
आज महिला दिवस बहुत ही व्यापक स्तर पर मनाया जाता है. इसका श्रेय महिला आन्दोलनों की सभी धाराओं को जाता है. लेकिन इस सत्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि महिला आन्दोलन को विश्व व्यापी बनाने, महिलाओं के मुद्दों को सभी विचारधारों के बीच ले जाने, और महिला मजदूरों को आन्दोलन के केंद्र में लाने का काम कमुनिस्ट महिलाओं ने ही किया. आज विज्ञापन कम्पनिया, बाज़ार, और पूंजीवादी पतनशील संस्कृति महिलाओं को फिर से घर में सीमित करके दहेज़, तलाक और शादी के ही सवालों में उलझाने में पूरी ताक़त से लगी है. दक्षिणपंथी अंधराष्ट्रवादी महिलाओं को सामाजिक श्रम से काट कर घर और धार्मिक क्रियाकलापों में व्यस्त रखना चाहते है.
इन हालात में एक बार फिर से कम्युनिस्ट  महिलाओं पर ही ये ज़िम्मेदारी है कि वे कार्यबल में महिलाओं की घटती संख्या, महिला मजदूरों की  न्यूनतम मजदूरी, सुरक्षित मातृत्व, मातृत्व अवकाश, साफ़, हिंसा मुक्त, सुरक्षित कार्यस्थल, सामान काम का सामान वेतन आदि मांगों पर महिलाओं को यूनियन में संगठित करें, उन्हें जन संघर्षों में उतारें. महिलाओं की राजनीतिक चेतना का विकास भी जन संघर्षों के साथ ही विकसित होगा. समाजवादी समाज, जहाँ सब को बिना किसी धर्म, जाति, रंग, भाषा, क्षेत्र, नस्ल के भेद भाव के पढने, बढ़ने का अवसर मिले, जहाँ कोई गरीबी,भूख, बीमारी का शिकार ना होगा, जहाँ बच्चों को बिना शर्त प्यार और बुजुर्गों को सम्मान और देखभाल मिलेगी, जहाँ हर बच्चा, चाहे उसके माता पिता हों, या ना हो, अपने आप को सुरक्षित महसूस करेगा, की स्थापना की ज़िम्मेदारी भी हमारे कन्धों पर है.
आइये आज के दिन एक बार फिर हम खुद से वादा करें कि अन्याय, शोषण और उत्पीडन के खिलाफ, और समाजवाद के निर्माण के लिए हम अपना जीवन समर्पित करने का वादा करे, क्यों कि हमें वह हालात हमें मंज़ूर नहीं जहाँ सिर्फ नफ़रत के नाम पर कोई किसी परिवार को तबाह कर दे, औरतों को बेवा करे और बच्चों को अनाथ कर दे.
इन्कलाब जिंदाबाद
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ.
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, 8 मार्च 2020  
आभार : लेख में तथ्यात्मक जानकारी जैसे घटनाएं व् तिथी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर लिखे इन्टरनेट पर मौजूद बहुत से लेखों और समाचारों से ली गयी है.
















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