1 मई के दिन दुनिया के हर मुल्क में हर सेक्टर में काम करने वाले मजदूर मिलकर मिलकर शिकागो के शहीदों को याद करते हैं और अपने अधिकार के लिए हर भेद भाव से ऊपर उठकर अपनी अंतर्राष्ट्रीय एकता, की प्रतिज्ञा करते हैं. आजकल काम के घंटे 8 घंटे से बढाकर 12 घंटे किये जा रहे हैं. और मई दिवस भी आया है. एक अच्छा मौक़ा है कि हम और 8 घंटे काम के अधिकार के इतिहास, और मई दिवस के महत्व को समझें. मई दिवस के महत्व को समझे इसके लिए हमे थोडा फ़्लैश बैक में जाना होगा. जब दुनिया में मशीन बनी, औद्योगिक क्रांति हुई तब, मालिक और पूंजीपति शब्द सुनाई देने लगे, उसी के साथ आज का मजदूर भी अस्तित्व में आया. इससे पहले ज़मींदार, किसान, गुलाम, बटाईदार,आदि हुआ करते थे. पुरानी फिल्मों में भी ज़मींदार का रॉब, सूदखोर, महाजन, का अन्याय और गरीब किसान की समस्या ज़रूर देखी होंगी. इसके बाद मालिक और मजदूर के रिश्तों को दर्शाती भी कई फिल्मे बनी .पूंजीवाद और मजदूर का जन्म साथ साथ हुआ. चाहे कितनी भी बड़ी फक्ट्री बना लो, कितनी बढ़िया मशीन लगा लो, मजदूर ना हो तो काम ही ना हो. उस वक़्त में, कही कही आज भी, फैक्ट्रियों में जो मजदूर काम करते थे उनके काम का कोई निश्चित समय नहीं था,12 से 14 घंटे तक लगातार काम ही करते रहते थे. उसपर काम के हालात बहुत खराब फैक्ट्री में रोशनी की कमी, गंदगी, कई कई घंटों तक एक ही अवस्था में काम करना. बीच में कोई आराम नहीं, कोई ब्रैक नहीं. बीमारी और थकान से त्रस्त मजदूरों कि औसत उम्र उस समय ४० साल थी. साम्यवादी विचार, फ्रेंच रेवोलुशन, नागरिक आंदोलनों के प्रभाव से काम के घंटे कम करने की बात शुरू हुई . अमेरिका में 1791 में काम के घंटे नियत करने के अधिकार का आन्दोलन शुरू हुआ. आठ घंटे काम के आन्दोलन की मांग उठी कि 8 घंटे काम के, 8 घंटे आराम के और 8 घंटे अन्य कामों के लिए चाहिए. कार्लमार्क्स ने दुनिया को बताया कि मजदूरी मजदूर के श्रम का नहीं श्रम शक्ति का भुगतान है. इससे दुनिया को नया नजरिया मिला. श्रम शक्ति या काम करने की क्षमता लगातार काम करने से गिरती जाती है. उसे पुन: रिचार्ज करने के लिए अधिकतम 8 घंटे आराम और 8 घंटे घर के अन्य काम, परिवार और रिश्तेदारों से मिलने, या अपनी पसंद का काम करने के लिए मिलने ही चाहिए. याद रखिये 8 घंटे अधिकतम है. साल 1884 में अमेरिका और कनाडा के मजदूर यूनियनों के फेडरेशन के सम्मेलन ने तय किया कि 1 मई, 1886 से सभी यूनियन से 8 घंटे के वर्किंग day को लागू करवायेंगी. 8 घंटे के आंदोलन को मजदूरों का बहुत समर्थन मिला. पूंजीपतियों में हड़कंप मच गया, वे तालाबंदी करके, मजदूरों को धमकाने के लिए जासूसों, ठगों, pinkarton के निजी सिक्यूरिटी गार्ड के साथ एकता को तोड़ने के लिए नफ़रत फ़ैलाने जैसी तिकड़म अपनाने लगे.1 मई से 8 घंटे के काम को लागु करवाना था, तो यूनियन जोर शोर से प्रचार में जुट गयीं. कुछ जगहों पर 8 घंटे के वर्किंग ऑवर कि मांग मानी भी गयी, पर पूंजीपति तैयार नहीं थे और वे आन्दोलन को कुचलने की तिकड़म सोचने लगे. अमेरिका में लगभग 5 लाख मजदूरों ने मई दिवस के जुलूस और प्रदर्शनों में हिस्सा लिया और दुनिया का पहला मई दिवस एक शानदार सफलता के साथ संपन्न हुआ. 8 घंटे काम का आंदोलन इतना तेजी से फैला कि नाइट्स ऑफ लेबर यूनियन की सदस्यता दो साल में 70 हज़ार से 7 लाख हो गयी. शिकागो, उद्योग का एक बहुत बड़ा केंद्र था और यहाँ ये आन्दोलन बहुत मजबूत था. यहाँ अल्बर्ट पार्सन और अगस्त स्पाइस जैसे तेजतर्रार नेता थे, यूनियन के पास कई हजार सक्रिय सदस्य थे और ये 3 भाषाओं में पांच तरह के अखबार निकालते थे। आइये समझते हैं, 1 मई की हड़ताल तो शांति के साथ निकल गयी, फिर ऐसा क्या हुआ कि ये दिन इतना यादगार बना . शिकागो में मैकार्मिक हार्वेस्टिंग मशीन कम्पनी के मजदूरों को तालाबंदी कर के 3 महीने पहले बाहर कर दिया गया था। कारखाने में पुलिस, pinkarton के भाड़े के निजी गार्ड, की देखरेख में हड़ताल तोड़क भर्ती किए गए थे और कारखाना इन्हीं के दम पर चलाया जा रहा था । 3 मई दोपहर की बात है हड़ताली मजदूरों को पुलिस की टुकड़ी ने रोका और उन पर लाठियों से हमला किया और निहत्थे मजदूरों पर गोलियां चला दी कम से कम 4 मजदूर मौके पर मारे गए और बहुत से घायल हो गए।स्पाइस ने तुरंत अंग्रेजी और जर्मन भाषा में दो पर्चे जारी करके इस ज़ुल्म का जिम्मेदार मालिकों को ठहराया और इन हत्याओं की निंदा करने के लिए 4 मई की शाम को है मार्केट में एक रैली बुलाई । इस रैली में 3000 के लगभग मजदूर इकट्ठा हुए शहर के मेयर यह सुनिश्चित करने के लिए कि रैली शांतिपूर्ण रहे खुद वहां पहुंचे । इस रैली में पहले स्पाइस ने भाषण दिया फिर पारसन ने. । भीड़ शांति के साथ सुन रही थी., और रैली शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी । मौसम खराब हो रहा था बारिश का अंदेशा था शहर के मेयर घर चले गए। पार्सन के साथ उनके बच्चे भी थे, मौसम बिगड़ता देख वे भी चले गए, स्पाइस भी दूसरी बैठक में भाग लेने के लिए वहां से चले गए । रात के लगभग 10:30 बजे थे । मजदूरों की संख्या बहुत कम रह गई थी, feelden एक वेगन पर खड़े होकर अपना भाषण कर रहे थे। जैसे ही feelden ने अपना भाषण खत्म किया और नीचे उतरे पुलिस बड़ी तादाद में वहां पहुंच गई और सभा समाप्त करने के लिए कहा filden पुलिस की बात का जवाब दे ही रहे थे कि भीड़ में से किसी ने बम फेंका कम से कम 7 पुलिसकर्मी मारे गए और 60 से अधिक घायल हुए . छ: मज़दूर मारे गये और 200 से ज्यादा जख्मी हुए। इसी खून से सना लाल रंग का कपडा मजदूरों का झंडा बना. प्रदर्शनकारियों में कितने मरे और कितने घायल हुए यह पूरी संख्या कभी सामने नहीं आई, क्योंकि गिरफ्तारी के डर से कोई भी घायल नागरिक इलाज के लिए नहीं आया. मजदूर नेताओं के घर,छापाख़ानों और कार्यालय पर पुलिस छापे मारे गए दर्जनों संदिग्धों को जो उस समय घटनास्थल पर भी नहीं थे उन्हें गिरफ्तार किया गया यहां तक कि सर्च वारंट के बगैर लोगों के घर में घुसकर तोड़फोड़ की गई. आठ मज़दूर नेताओं — अल्बर्ट पार्सन्स, आगस्ट स्पाइस, जार्ज एंगेल, एडाल्फ़ फ़िशर, सैमुअल फ़ील्डेन, माइकेल श्वाब, लुइस लिंग्ग और आस्कर नीबे — पर झूठा मुक़दमा चलाकर उन्हें हत्या का मुजरिम क़रार दिया गया। फील्डें के घुटने में गोली लगी हे मार्केट आरोपियों में वे अकेले थे जिन्हें गोली लगी थी।. पार्सन्स गिरफ्तारी से बच गए और विस्कॉन्सन चले गए, जहां वह 21 जून तक रहे; बाद में, उन्होंने अपने साथियों के साथ एकजुटता में खड़े होने के लिए खुद ही आत्म-समर्पण कर दिया ये साबित ना हो सका कि इनमे से किसी ने भी बम फेंका या बम फेंकने की साज़िश में शामिल थे. 20 अगस्त 1887 को शिकागो की अदालत ने सात लोगों को सज़ा-ए-मौत और एक नीब को को पन्द्रह साल क़ैद बामशक्कत की सज़ा दी गयी। सैमुअल फ़ील्डेन, माइकेल श्वाब के अनुरोध पर उनकी सज़ा को आजीवन काराबास में बदल दिया गया.10 नवम्बर 1887 को सबसे कम उम्र के नेता लुइस लिंग्ग ने कालकोठरी में आत्महत्या कर ली। 11 नवम्बर 1887, शुक्रवार को पार्सन्स, स्पाइस, एंगेल और फ़िशर को फाँसी दी जानी थी. पर सरकार को इससे भी सुकून ना मिला और अफ़सरों ने मज़दूर नेताओं की मौत का तमाशा देखने के लिए शिकागो के लगभग 180 धनवान शहरियों को बुला रखा था। उन्हें लगा कि ये मजदूर मरते समय रोयेंगे या गिदगिड़ायेंगे. पर ऐसा ना हुआ वहाँ मौजूद एक पत्रकार ने बाद में लिखा : चारों मज़दूर नेता क्रान्तिकारी गीत गाते हुए फाँसी के तख्ते तक पहुँचे और शान के साथ अपनी-अपनी जगह पर खड़े हो हुए। फाँसी के फन्दे उनके गलों में डाल दिये गये। स्पाइस का फन्दा ज्यादा सख्त था, फ़िशर ने जब उसे ठीक किया तो स्पाइस ने मुस्कुराकर धन्यवाद कहा। फिर स्पाइस ने चीख़कर कहा, ‘एक समय आयेगा जब हमारी ख़ामोशी उन आवाज़ों से ज्यादा ताक़तवर होगी जिन्हें तुम आज दबा रहे हो…’ फिर पार्सन्स ने बोलना शुरू किया, ‘मेरी बात सुनो… अमेरिका के लोगो! … जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकेगा…’ लेकिन इसी समय तख्ता खींच लिया गया। 13 नवम्बर को पांचों मज़दूर नेताओं की शवयात्रा शिकागो के मज़दूरों की एक विशाल रैली में बदल गयी। पाँच लाख से भी ज्यादा लोग इन नायकों को आख़िरी सलाम देने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। इन पांचों को फॉरेस्ट पार्क में जर्मन वेल्थहेम सिमेट्री , में दफनाया गया। filden को छोड़ सभी यहाँ दफन हैं. अब सैमुअल फ़ील्डेन, माइकेल श्वाब और नीब ही जेल में थे. 6 साल बाद 26 जून, 1893 को इलिनॉइस के गवर्नर जॉन पीटर अल्टगेल्ड ने इन आरोपियों को इन पर लगे सभी आरोपों से मुक्त करके रिहा कर दिया । रिहा करते हुए उन्होंने को इस केस में अन्याय करने के लिए पूरी न्याय वयवस्था की आलोचना की. इस फैसले के को लेकर उनका क्रिटिसिज्म भी हुआ, जिसके जवाब में उनहोंने बहुत से लेख लिखे और भाषण दिए.1893 में हे मार्केट शहीद स्मारक, बनाया।फांसी के वक़्त बोले गए स्पाइस के आख़िरी शब्द यहाँ खुदे हुए हैं.स्मारक के पीछे की साइड में इन सभी शहीदों के नाम लिखे हैं, और यहां एक प्लेट पर जॉन पीटर अल्टगेल्ड कें पत्र की पंक्तियाँ अंकित हैं, जिसमें उन्होंने in सभी को आरोप मुक्त किया हैं . 1 मई का दिन इन्हीं संघर्षों और कुर्बानियों को याद करने का दिन है, और ये भी याद करने का दिन है कि जाति धर्म सेक्स भाषा रंग क्षेत्र के भेद भाव और अंधराष्ट्रवाद को हराकर ही मजदूर अपनी लड़ाई जीत सकता है. इसीलिये इस दिन सभी मजदूर अपने महान शिक्षक कार्ल मार्क्स के दिए नारे को बुलंद करते हैं कि दुनिया के मजदूरों एक हो । आज जब वोर्किंग ऑवर 8 घंटे से 12 घंटे किये जा रहे हैं, प्रवासी मजदूरों के काम, खाने रहने का कोई ठिकाना नहीं हैं , महिला मजदूरों और स्वास्थ्य कर्मियों को कार्यस्थल पर सुरक्षा का अभाव है.आज मजदूर वर्ग बहुत सी चुनोतियों से घिरा हैं. |
मेरे ब्लॉग दी लखनऊ पोस्ट में आपका स्वागत है. दी लखनऊ पोस्ट संस्कृति, साहित्य, समाज, संगीत, शिक्षा, स्वास्थ्य, रैशनल थिंकिंग, पर्यावरण, राष्ट्रीय व् अंतर्राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विचार विमर्श और सूचना प्रदान करने का मंच है. धन्यवाद अरुणिमा, अपने विचार हमे ईमेल द्वारा भी भेज सकते हैं . हमारा ए मेल पता है thelucknowpost1@gmail.com
Friday, May 1, 2020
मई दिवस का शानदार इतिहास हमेशा प्रेरणा देता रहेगा, आईये इसे जाने, समझे ...
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
जर्मन कवि बर्तोल्त ब्रेख्त (ब्रेष्त) की कवितायें प्रचार की ज़रूरत - बैर्तोल्त ब्रेष्त आदमखोरों के लिए जर्मन युद्ध प्रवेशिका / बैर्तोल्त ब्र...
-
लॉक डाउन : वर्कर के उत्पीडन का सरकार को अवसर ...
No comments:
Post a Comment