लव जिहाद के नाम पर हिंदू लड़कियों का उत्पीड़न और अपमान
देश में किसानों का इतना बड़ा आंदोलन चल रहा है और देश के हर कोने में किसान आंदोलित है किसानों के साथ-साथ युवा छात्र महिला संगठन भी सक्रिय हैं लेकिन उत्तर प्रदेश के अंदर आर एस एस बी जे पी के से जुड़े युवा के लिए किसान कोई मुद्दा नहीं है वह तो टीम बनाकर कचहरी और मैरिज रजिस्ट्रार के कार्यालय पर ड्यूटी कर रहे हैं कि कोई हिंदू लड़की और मुस्लिम लड़का शादी पंजीकरण के लिए आएं और वह उन्हें पकड़ ले। यह काम लंबे समय से यह युवा संगठन करते आ रहे हैं लेकिन विधेयक आने के बाद इन हिंदू संगठनों के युवाओं के हौसले बुलंद हैं, क्योंकि उनके कारनामों को कानूनी आधार मिल गया है। पकड़े जाने के बाद ये हिंदू युवती पर बहुत गंदी और अशोभनीय टिप्पणियां की जाती है।
पुलिस भी ऐसा ही व्यवहार करती है, जैसे उस लड़की ने घोर पाप किया हो और ये हिन्दू युवा ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे वे नरक के कर्मचारी हैं और इन्हें उनके उत्पीड़न का पूरा हक मिल गया है।मेरे शहर में कल 6 दिसम्बर को ऐसी एक घटना के कारण मुझे ये पोस्ट लिखनी पड़ रही है।
मुस्लिम लड़कों के साथ और उनके परिवार के साथ जो व्यवहार किया जाता है उसका सब अनुमान लगा ही सकते हैं। मैं यहां पर उस लड़की पर होने वाले अत्याचार के बारे में बात कर रही हूं कि उस लड़की और लड़की के परिवार को इन हिंदू संगठनों द्वारा अपमानित और उत्पीड़ित किया जाता है, अशोभनीय और अश्लील फिकरे कसे जाते हैं , लड़की की शादी या तो वाहिनी के लड़के से या किसी और लड़के से शादी करने के लिए दबाव डाला जाता है और कहा जाता है कि लड़की मां बाप से कंट्रोल नहीं हो रही थी इसलिए मुसलमान लड़के से शादी कर रही थी वैसे कंट्रोल करने के लिए यह जरूरी है कि इसकी शादी तुरंत कर दी जाए ।
यह एक बहुत बड़ा उत्पीड़न और अत्याचार हो रहा है इस पर विवेकशील और तार्किक नजरिए के साथ हिंदू परिवारों हिंदू समाज को सोचने की आवश्यकता है।आर एस एस और बी जे पी से जुड़े हिंदू युवा और अन्य संगठन हिंदू लड़कियों की शादी में दहेज की समस्या और दहेज के कारण होने वाले उत्पीड़न और मौतों पर सवाल नहीं उठाते
अभी तक लव जिहाद का एक भी केस पकड़ में नहीं आया है, वैसे हिंदू मुस्लिम शादी के 5 केस पकड़े गए हैं। इन सभी केसों में लड़की ने शादी के लिए अपनी सहमति दी है। लेकिन समाज में एक ऐसा सांप्रदायिक और जहरीला माहौल बनाया जा रहा है जिसमें लड़कियां घर से बाहर ही ना निकल पाए, माता-पिता को यह लगे कि पढ़ाई इतनी जरूरी नहीं है जितना लड़की को किसी मुस्लिम लड़के से शादी करने से दूर रखना है। ऐसा करते हुए इन लड़कियों के माता-पिता समझ नहीं पा रहे हैं किस तरह लड़कियों को शिक्षा, उनके बहुमुखी विकास, नौकरी और आगे बढ़ने के समान अवसर से उसे उन्हें वंचित कर रहे हैं और ऐसा करके बेटियों और संविधान दोनों के सामने अपराध कर रहे हैं।
लव जिहाद के नाम पर हिंदू लड़कियों की शादी मुस्लिम लड़कों से ना होने देने के लिए जगह जगह r.s.s. से जुड़े हिंदू युवक युवतियों को पकड़ रहे हैं जो किसी मुस्लिम लड़के के साथ शादी करने के लिए कोर्ट या कचहरी आती ।
हिंदू युवा इस काम को लंबे समय से कर रहे थे लेकिन अब उन्हें इन युवतियों को पकड़ने का एक कानूनी आधार मिल गया है उनका कहना है कि किसी भी हिंदू लड़की की शादी मुस्लिम लड़के से नहीं होने देंगे ।
मेरा सवाल यहां यह है की हिंदू समाज में लड़कियों के विवाह से जुड़ी एक बहुत बड़ी कुरीति हे दहेज, और यह आज से नहीं पहले से चली आ रही है। यह कुरीति इतनी गहराई के साथ समाज के अंदर घुसी हुई है कि शादी एक तरीके का मोल भाव का ही व्यापार बन गई है। लड़की चाहे कितनी भी पढ़ी लिखी हो जब तक उसके साथ मोटा दहेज ना हो उसकी शादी होनी मुश्किल है उस पर भी सितम यह है कि मोटा दहेज देने के बाद भी लड़की की सुरक्षा और उसकी खुशी की कोई गारंटी नहीं है। दहेज के लिए पैसा जोड़ने के चक्कर में माता-पिता लड़कियों की पढ़ाई में कटौती करते हैं लड़की पैदा हो उस उस के जन्म से पहले ही टेस्ट कर आते हैं और लड़कियों का प्रतिशत या लिंग अनुपात समाज में भी लगातार गिरता जा रहा है इतनी गंभीर समस्याओं समस्याएं होने पर भी आर एस एस अपने युवा संगठनों से दहेज का बहिष्कार करने बिना दहेज के शादी करने सादगी के साथ शादी करने ऐसी शिक्षा पर जोर देने की बात नहीं कर रही है। बल्कि हो तो इसका उल्टा रहा है आर एस एस के बड़े-बड़े नेता बीजेपी के मंत्री अपने बच्चों की शादी बहुत शान और शौकत से कर रहे हैं मंत्री पूरे विभाग को अपने संतान की शादी में लगा देते हैं सरकारी खर्चे से मेहमानों की अगवानी करते हैं और मोटी रकम दिखावे पर खर्च करते हैं। आज जब आर एस एस पूर्ण बहुमत में है प्रदेश और देश में सरकार है तो एक ऐसी बुराई जिसने स्त्रियों का जीवन क्लेश से भर दिया है, उस सामाजिक बुराई को दूर करने के लिए यह क्यों नहीं आge आ रहे ।
अगर देश के प्रधानमंत्री बीजेपी अध्यक्ष या संघ प्रमुख युवाओं को एक आदेश दे दें कि आर एस एस से जुड़े युवा बिना दहेज के शादी करेंगे , सरकार दहेज विरोधी कानून को लागू करेंगे तो हिंदू लड़कियों का और हिंदू परिवारों का भला होगा।
समाज को सोचना चाहिए की आर एस एस और इनके हिंदू युवा लड़कियों की शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार इनके के मुद्दे क्यों नहीं उठाते हैं और इन महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर लड़कियों को मुस्लिम लड़कों से दूर रखने का माहौल बनाकर की बात करके एक आतंक का माहौल डर का माहौल समाज के अंदर क्यों बनाते हैं ।
दरअसल आर एस एस बी जे पी के पास समाज के गरीबों के लिए कोई कार्यक्रम विकास का नहीं है तो उनके अंदर डर पैदा कर कर रहे है ।जबकि हिंदू लड़कियों को इस तरह का कोई डर होना ही नहीं चाहिए क्योंकि समाज में जबरदस्ती कोई भी किसी से शादी नहीं कर सकता।
r.s.s. बीजेपी हिन्दुओं में मुसलमानों से डर का माहौल बना रहे हैं इससे उनके दो फायदे हैं एक तो हिंदू परिवारों को अपने नियंत्रण में रखना इस तरह से उनके वोट को अपने नियंत्रण में रखना और उनके अंदर यह अहसास पैदा करना कि हिंदू संगठन उनकी रक्षा कर रहे हैं, दूसरा मकसद है आर एस एस की जो महिलाओं के बारे में सोच है कि महिलाएं शिक्षा और रोजगार से दूर रहें सिर्फ घर के अंदर रहे, वही भूमिका में महिलाओं को रखना। लड़कियां उच्च शिक्षा के लिए बाहर ना निकले ना ही नौकरी करने के लिए जाएं और अगर ऐसा चाहे तो माता-पिता डर से बाहर ना जाने दे।
समाज के उच्च वर्ग या समृद्ध वर्ग के लिए यह कोई समस्या नहीं है बीजेपी के बहुत से नेता और उनके बच्चे आराम से मुस्लिमों के साथ पढ़ते भी हैं और शादी भी कर लेते हैं किसी को कोई एतराज नहीं होता लेकिन गरीबों के लिए ऐसा माहौल बना रहे हैं कि गरीब लड़कियां गरीब परिवार या सामान्य परिवार की लड़कियां आगे ना निकल पाए शिक्षा का जो प्रसार हुआ है उसमें पिछड़े दलित आदिवासी इन परिवारों की लड़कियां शिक्षा और नौकरी में आगे आई हैं और इस तरह इन परिवारों का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण भी हुआ है सशक्तिकरण में लड़कियों की शिक्षा और उनके रोजगार भले ही चाहे छोटा सा हो उसकी बड़ी भूमिका है इसी पर आर एस एस की नजर है क्योंकि अगर सचमुच में उन्हें हिंदू लड़कियों से हमदर्दी है उनकी शिक्षा उनके रोजगार पर ध्यान दें ।
लेकिन ये तो शिक्षा रोजगार और प्रगति से वंचित करके जी हालत के अंधेरे में कैद करके औरत की हिफाजत के नाम पर लड़कियों की हिफाजत के नाम पर उन्हें डर आतंक असुरक्षा के गर्त में धकेल रहे हैं।
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