मोदी सरकार ने अपने पूरे पहले कार्यकाल में एवं दूसरे कार्यकाल में शुरू से लगातार यह बात कही है कि 3 से 6 साल तक के बच्चों को भी शिक्षा अधिकार कानून के अंतर्गत कवर किया जाएगा लेकिन इस नीति में कानून का दायरा बढ़ाने की बात नहीं की गई है अगर शिक्षा अधिकार कानून में 3 से 6 साल के उम्र के बच्चों को ले आते ईसीसी प्री प्राइमरी के लिए तब आंगनवाड़ी केंद्रों में चलाने के लिए सरकार को बाध्य किया जा सकता था सरकार ने ऐसा नहीं किया और लगातार 6 साल तक आंगनवाड़ी को अध्यापिका बनाने का सपना दिखाकर आखिर में आंगनवाड़ी केंद्रों की अस्तित्व को ही खत्म करने की तरफ कदम बढ़ा दिया।
अब दूसरी बात आंगनवाड़ी वर्कर को भी
प्रशिक्षण देकर शिक्षक बनाने की बात इस नीति में की गई है , लेकिन उसे शिक्षक
का दर्जा मिलेगा यह यह बात नहीं कही गई है। आंगनवाड़ी के आंदोलन आंदोलन से सरकार
परिचित है इसीलिए उन्हें यह महसूस कराया है कि सरकार आंगनवाड़ी केंद्र को मजबूत
करेगी जबकि योजना सारी केंद्रों को कमजोर करने की और इन्हें खत्म करने की ही है।
आंगनवाड़ी के प्रशिक्षण के लिए पहले से ही निप्सेड का का सुव्यवस्थित तंत्र पूरे
देश में है।
नयी शिक्षा नीति में ecce के इस हिस्से
को पूरा पढ़कर कुछ सवाल उठते हैं-
- 3 से 6 साल के बच्चों को शिक्षा
नीति में शामिल ही क्यों किया गया जबकि वे तो ecce के अंतर्गत और महिला और बाल
विकास मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं, और अब 3 से 6 साल के बच्चों के लिए नयी शिक्षा
नीति के अनुसार प्री प्राइमरी स्कूल खोले जा सकते हैं ?
- 3 से 6 साल के बच्चों को शिक्षा अधिकार कानून का हिस्सा या अलग से इसी
तरह का ecce गारंटी कानून क्यों नहीं बनाया ?
- आंगनवाड़ी केंद्र के होते हुए अलग से बाल वाटिका कि क्या आवश्यकता है ?
ऐसा क्या है बाल वाटिका में जो आंगनवाड़ी केंद्र में नहीं है.
ecce/इसीसीई/प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल
और स्कूल पूर्व शिक्षा में अंतर : एक शब्द आजकल बड़ा
पॉपुलर हो रहा है वह प्री प्राइमरी एजुकेशन यह शब्द कहां से आया इतना प्रचलित हुआ
कि इस एसईसी को पीछे छोड़ दिया स्कूल पूर्व शिक्षा यानी प्री प्राइमरी एजुकेशन और
बाल देखभाल और विकास को समानार्थी समझने लगे। जबकि दोनों में बहुत अंतर है प्री प्राइमरी
एजुकेशन का अर्थ है प्राइमरी कक्षा में दाखिला लेने से पहले बच्चे को मानसिक और
शारीरिक रूप से स्कूल में पढ़ाई के लिए तैयार किया जाए और ईसीसी का अर्थ है
प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा विकास के अंतर्गत बच्चों को के संज्ञानात्मक विकास
भाषा परीवेश की समझ शारीरिक विकास आदि पर ध्यान दिया जाता है। तनाव मुक्त वातावरण
मैं खेल संगीत बाल सुलभ गतिविधियों के माध्यम से बच्चे के शरीर उसकी भाषा उसकी
संज्ञानात्मक क्षमताओं के विकास की ओर ध्यान दिया जाता है यह बहुत महत्वपूर्ण है
शिशु के भावनात्मक आवश्यकता का भी बहुत ख्याल रखा जाता है।
इस प्रकार ईसीसीई के अन्तर्गत शिशु के घर के सीमित वातावरण का
विस्तार करते हुए उसे एक सामाजिक परिवेश में जहां अन्य बच्चे उसके साथ होते हैं
उनके बीच इस विस्तार का मौका दिया जाता है। शिशु के इस प्रकार की वातावरण का
उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त अध्यापक अध्यापिका की आवश्यकता होती
है जो धैर्य और संयम के साथ शिशुओं के साथ इन शिशुओं के विकसित होने में शेरों की
भूमिका निभाते हैं। इनकी शिक्षा हेतु विशेष क्यों निकाला शिक्षा प्रशिक्षण सामग्री
बच्चों के लिए खेल खिलौने आदि तैयार किए जाते हैं जैसा की नई शिक्षा नीति में भी
कहा गया है और दुनिया के सभी बाल शिक्षा विशेषज्ञों का भी कहना है के बच्चे के
मस्तिष्क का अधिकांश विकास 5
साल की उम्र तक हो जाता है इसलिए 5 वर्ष की आयु तक
विशेष प्रशिक्षित अध्यापक की देखरेख में बच्चों की देखरख की जानी चाहिए। ईसाइयों
में ही उचित पोषण और स्वास्थ्य की देखभाल की भी जरूरत होती है क्योंकि यदि इस उम्र
में शिशु कुपोषण का शिकार हो जाए या बीमारियों का शिकार हो जाए तो उसके आगे के
विकासशारीरिक और मानसिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है ।
इसी सोच के साथ देश में1974 में बाल शिक्षा नीति को बनाया गया और
इस बाल शिक्षा नीति के अनुरूप आंगनवाड़ी केंद्र की परिकल्पना की गई और 1975 में सीमित इलाकों
में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना की गई।मां के कुपोषित और एनीमिक होने का शिशु
के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है इसलिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर गर्भवती और
धात्री महिलाओं के पोषण और टीकाकरण की ज़िम्मेदारी भी दी गई । विकसित देशों और
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आंगनवाड़ी केंद्र में माता और धात्री के पोषण, शिशु के पोषण
स्वास्थ्य की देखभाल टीकाकरण,
आदि सेवाओं की जिम्मेदारी आंगनवाड़ी
केंद्रों की गईथी।
नई शिक्षा नीति में बाल विकास बाल
मनोविज्ञान और बाल शिक्षा के स्थापित मानको और सिद्धांतों के विपरीत बहुत ही
तिकड़म और चालाकी के साथ इसे ईसीसीडी के पेपर
में लपेट कर प्री प्राइमरी शिक्षा की शुरुआत कर दी है।
बहुत ही आकर्षक तरीके से ग्राफ बनाकर
उम्र के बंटवारे के आधार पर अपनी बात को सही साबित करने की कोशिश की है। नई शिक्षा
नीति में उम्र का बंटवारा बिल्कुल अवैज्ञानिक और शिक्षा मनोविज्ञान के सिद्धांतों
के बिल्कुल विपरीत है सभी विकसित देशों में पढ़ने की 5 साल के बाद ही मानी जाती है कुछ
जगहों पर 5 प्लस को स्कूल मैं शिक्षा पाने के लिए बच्चे को शारीरिक, मानसिक और
मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार किया जाता है, और औपचारिक शिक्षा की शुरुआत हो जाती
है।
सरकार ने स्कूल पूर्व शिक्षा की बात
क्यों की है
आज के वक्त में इंजीनियरिंग कॉलेज
खाली पड़े हैं मेडिकल संस्थानों नर्सिंग संस्थानों को मालिक चला नहीं पा रहे हैं
फीस इतनी ज्यादा है यह चाहते हुए भी बच्चे एडमिशन नहीं ले पा रहे हैं ऐसे में प्री
प्राइमरी के क्षेत्र में बड़े बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पूंजीपति और
कॉरपोरेट अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के तहत प्राइवेट स्कूलों के साथ मिलकर इंटरनेशनल
स्कूल खोल रहे हैं और इसकी फ्रेंचाइजी नीचे जिलो के अंदर दे रहे हैं और इसमें
बच्चों से मोटी फीस वसूल करके और इस सिद्धांत के आधार पर की मजबूत बुनियाद पड़ेगी
तो बच्चे का व्यक्तित्व का चौमुखी विकास होगा यह लुभावना नारा देकर खूबसूरत बिल्डिंग
में तरह-तरह की पेंटिंग लगाकर विदेशी कार्टूनों के स्कूलों में पेंटिंग लगाकर साथ
में अंग्रेजी का की किताबों और बोलने वाले अध्यापकों को रखकर एक लुभावना बाजार बना
रहे हैं बन गया है आप क्यों की सरकारी स्तर पर 5 साल से अधिक के बच्चे को कक्षा एक में
एडमिशन मिल सकता है तथा स्कूल पूर्व शिक्षा में प्राइवेट स्कूल खोलने की इजाजत
नहीं थी जो लोग भी प्री प्राइमरी के नाम पर नर्सरी एलकेजी यूकेजी चला रहे थे वह
मान्यता प्राप्त नहीं होता था शिक्षा अधिकारी उसे देख कर भी अनदेखी कर देते थे अब
इस नीति के आने के बाद प्री प्राइमरी के यह सभी संस्थान औपचारिक हो जाएंगे । यही
नहीं अब स्थानीय व्यापारी द्वारा भी फ्रेंचाइजी के माध्यम से निजी स्कूल के एक
बड़े बाज़ार को वैधता हासिल हो गई है। सभी जानते हैं कि इन इंटरनेशनल स्कूलों में
नर्सरी से ही किताबों का भारी बोझ बच्चों पर डाल दिया जाता है बस्ते से लेकर
यूनिफार्म जूते मोजे खेल का सामान प्रतिदिन की गतिविधियां का सामान सब कुछ स्कूल
से खरीदना पड़ता है इस समय प्री प्राइमरी स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफे का
सबसे बड़ा साधन है आज उच्च शिक्षा संस्थानों और तकनीकी संस्थानों के मुकाबले प्री
प्राइमरी स्कूल खोलकर खोलना कम जोखिम भरा और मोटे मुनाफे का स्रोत है।
ज्यादा से ज्यादा मुनाफा और जल्दी से जल्दी मुनाफा यह पूंजीवाद का खास गुण है । इस के लिए एक से एक उन्नत मशीनों का प्रयोग करता है, बाजार में उत्पादों का ढेर लगा देता है, और डिस्प्लेजर ही सस्ते श्रम की तलाश में दुनिया भर में कहीं भी जा सकता है सरकार को प्रभावित करता है ताकि श्रमिकों को नियंत्रित करके कम से कम मजदूरी पर काम करा कर ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाया जा सके नई शिक्षा नीति आई है मूल में भी यही नजरिया है दुनिया के सभी विकसित और शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने वाले देशों में बच्चे की शुरुआती 6 वर्ष की शिक्षा पर उसके स्वास्थ्य पोषण और सीखने पर जोर दिया जाता है इन चीजों का ख्याल रखा जाता है इसके लिए विशेष स्कीम है और योजना चलाई जाती है हमारे देश में अभी तक स्कूल पूर्व शिक्षा की कोई नीति लागू नहीं थी लेकिन आंगनवाड़ी के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा और ध्यान दिया जा रहा था मनोवैज्ञानिक शिक्षा मनोविज्ञान के विशेषज्ञ और समाज शास्त्रियों के भी यही नजरिया है की और 5 प्लस से स्कूल की तैयारी का साल होना चाहिए, औपचारिक शिक्षा की शुरुआत सिक्स प्लस से होनी चाहिए।
निजी क्षेत्र में बड़े-बड़े निजी विद्यालयों में 3 साल की उम्र से ही प्री प्राइमरी स्कूल की शिक्षा, नर्सरी, एल के जी, यू के जी के नाम पर दी जा रही है। यह तीनों साल की शिक्षा कक्षा 1 में प्रवेश से पहले तैयारी के साल के रूप में देखे जाते हैं। पूंजीवादी शिक्षा का पैटर्न यही है , यानी 3 साल की स्कूल पूर्व शिक्षा औपचारिक शिक्षा की प्रारंभिक स्टेज है और यह ईसीसीई या स्कूल पूर्व शिक्षा से बुनियादी रूप से भिन्न, और बहुत घटिया दर्जे कि है.
नयी शिक्षा नीति ने आंगनवाड़ी के असतितव
पर ही खतरा खड़ा कर दिया.
नयी नीति के नाम पर ये विकृती हमारे बच्चों
के भी हक में नहीं है. इसी बात को समझने और समझाने की आज ज़रूरत है.

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