भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीमराव रामजी आम्बेडकर सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे. उन्होंनेस्वतंत्रता, समानता, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, के लिए बिना किसी समझौते के संघर्ष किया.उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरणा देता रहेगा.बाबा साहब डॉ भीमराव आम्बेडकर कि ये 129 वीं जयंती है . आइये बाबा साहब की जीवन यात्रा को देखते हुए उन्हें याद करें.
1. बाबा साहब डॉ आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891को आज के मध्य प्रदेश के
इंदौर में स्थित महू नगर की सैनिक छावनी में हुआ था. आम्बेडकर के दादा का नाम मालोजी सकपाल था, तथा पिता का नाम रामजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। । उनका परिवार कबीर पंथ कोमानने वाला मराठी मूल
का था और वे वर्तमान महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिलेमें आम्डबे गाँवके निवासी थे.
इंदौर में स्थित महू नगर की सैनिक छावनी में हुआ था. आम्बेडकर के दादा का नाम मालोजी सकपाल था, तथा पिता का नाम रामजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। । उनका परिवार कबीर पंथ कोमानने वाला मराठी मूल
का था और वे वर्तमान महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिलेमें आम्डबे गाँवके निवासी थे.
2. 1906 मेंबाबा साहब आम्बेडकर जब पाँच वर्ष के थे तब उनकी माँ की मृत्यू हो गयी थी।
3. बाबा साहब आंबेडकर ने सातारा शहरके गवर्न्मेण्ट हाईस्कूल में 7 नवंबर1900 को
अंग्रेजी की पहली कक्षा में प्रवेश लिया.
अंग्रेजी की पहली कक्षा में प्रवेश लिया.
4. बाबा साहब के पिता रामजी सकपाल ने अपने बेटे के नाम में उपनाम
सकपाल की बजाय आम्ब्डेकर लिखवाया, जो कि उनके आम्डबे गाँव से संबंधित था। यही आगे चलकरआंबेडकर हो गया.
सकपाल की बजाय आम्ब्डेकर लिखवाया, जो कि उनके आम्डबे गाँव से संबंधित था। यही आगे चलकरआंबेडकर हो गया.
5.
बाबा साहब आम्बेडकर ने तीन महानव्यक्तियों को अपना गुरु माना, तथागत गौतम बुद्ध, संत कबीर और महात्मा ज्योतिराव फुले थे।उनके तीन देवता थे — ज्ञान, स्वाभिमानऔर शील.
बाबा साहब आम्बेडकर ने तीन महानव्यक्तियों को अपना गुरु माना, तथागत गौतम बुद्ध, संत कबीर और महात्मा ज्योतिराव फुले थे।उनके तीन देवता थे — ज्ञान, स्वाभिमानऔर शील.
6.
अप्रैल 1906 में, जब भीमराव लगभग 15 सालके थे, तोनौ साल की रमाबाई से
उनकी शादी कराई गई . उन दिनों भारत में बाल-विवाह काप्रचलन था। रमाबाई और भीमराव को पाँच बच्चे भी हुए लेकिन 'यशवंत' को छोड़कर सभी संतानों की बचपन में ही मौत हो गई थीं।
अप्रैल 1906 में, जब भीमराव लगभग 15 सालके थे, तोनौ साल की रमाबाई से
उनकी शादी कराई गई . उन दिनों भारत में बाल-विवाह काप्रचलन था। रमाबाई और भीमराव को पाँच बच्चे भी हुए लेकिन 'यशवंत' को छोड़कर सभी संतानों की बचपन में ही मौत हो गई थीं।
7. 1897 में, बाबा साहब आम्बेडकर का परिवार मुंबई चला गया जहांउन्होंने गवर्न्मेंट
हाईस्कूल में दाखिला लिया.
हाईस्कूल में दाखिला लिया.
8. 1907 में, उन्होंने अपनी मैट्रिक परीक्षा पास की और अगले साल बॉम्बे विश्वविद्यालय सेसंबद्ध एल्फिंस्टन कॉलेज में दाखिला लिया.
9. 1912 तक, उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र औरराजनीतिक विज्ञान में (बी॰ए॰)पास करके बड़ौदा राज्य सरकार के साथ कामकरने लगे।
10. 2 फरवरी1913 कोउनके पिता का निधन हो गया।
11. इसी साल, सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय द्वारास्थापित एक स्कोलरशिप योजना के तहत 22साल की उम्र में अमरीका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में
तीन साल के पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए चले गए.
तीन साल के पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए चले गए.
12. जून 1915 में उन्होंने अपनी एम॰ए॰ की परीक्षा पास की, जिसमेंप्रमुख विषय अर्थशास्त्र, औरअन्य विषय समाजशास्त्र, इतिहास, दर्शनशास्त्र और मानव विज्ञान थे।
13. 1916 में दूसरा एमए किया. बाबा साहब को स्कोलरशिप 3 साल के लिए मिली थी लेकिन उनहोंने केवल दो सालों में अमेरिका में पाठ्यक्रम पूरा किया और 1916 में वे लंदन गए।
14. लंदन मेंउन्होंने बैरिस्टरकोर्स के लिए प्रवेश लिया, औरसाथ ही लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स मेंभी प्रवेश लिया जहां उन्होंने अर्थशास्त्र की डॉक्टरेट थीसिस
पर काम करना शुरू किया। जून 1917 में, बड़ौदा राज्य से उनकी छात्रवृत्ति समाप्त होने केकारण उन्हें अपना अध्ययन बीच में ही छोड़र भारत लौटना पड़ा.
पर काम करना शुरू किया। जून 1917 में, बड़ौदा राज्य से उनकी छात्रवृत्ति समाप्त होने केकारण उन्हें अपना अध्ययन बीच में ही छोड़र भारत लौटना पड़ा.
15. 1920 कोल्हापुर के शाहू महाराजऔर अपने पारसी मित्र के सहयोग व् कुछ
निजी बचत से एक बार फिर से इंग्लैंड वापस जाने में सफ़ल हो पाए तथा 1921 मेंएम॰एससी॰ कीडिग्री प्राप्त की,
निजी बचत से एक बार फिर से इंग्लैंड वापस जाने में सफ़ल हो पाए तथा 1921 मेंएम॰एससी॰ कीडिग्री प्राप्त की,
16. 1922 में, बैरिस्टर-एट-लॉ डिग्री मिली और उन्हें ब्रिटिश बार में बैरिस्टर के
रूप में प्रवेश मिल गया।
रूप में प्रवेश मिल गया।
17.1923 में, उन्होंने अर्थशास्त्र में डी॰एससी॰ (डॉक्टरऑफ साईंस) उपाधि प्राप्त की। उनकी थीसिस का सब्जेक्ट था रुपये की समस्या: इसकीउत्पत्ति और इसका समाधान.
18. उनकी तीसरी और चौथी डॉक्टरेट्स आनरेरीउपाधियाँ थीं. 1952में एलएल॰डी॰, कोलंबियाविश्वविद्यालय, और1953में डी॰लिट॰, उस्मानिया विश्वविद्यालय, द्वारा
डॉक्टरेट के उपाधियाँ दी गयीं.
डॉक्टरेट के उपाधियाँ दी गयीं.
19. बाबा साहब आम्बेडकर ने कहा था"छुआछूत गुलामी से भी बदतर है। बाबा साहब बड़ौदा के रियासत राज्य द्वाराशिक्षित थे, अतःउनकी सेवा करने के लिए बाध्य थे। उन्हें महाराजा गायकवाड़ का सैन्य सचिव नियुक्तकिया गया, लेकिनजातिगत भेदभाव के कारण कुछ ही समय में उन्हें यह नौकरी छोड़नी पडी, उन्होंने भारत
में छुआछूत के खिलाफ आन्दोलन शुरू किया .
में छुआछूत के खिलाफ आन्दोलन शुरू किया .
20. भारत सरकार अधिनियम1919, तैयारकर रही कमेटी के सामने बाबा साहब ने दलितों और अन्यधार्मिक समुदायों को पृथक निर्वाचन और आरक्षण देने
की वकालत की।
की वकालत की।
21. 1920 में, बंबई से, उन्होंनेसाप्ताहिक मूकनायक के प्रकाशन की शुरूआत की। बाबा
साहब ने इसका प्रयोग रूढ़िवादी हिंदू राजनेताओं के जातीय भेदभाव से लड़ने की इच्छाशक्ति ना होने की आलोचना करने के लियेकिया।
साहब ने इसका प्रयोग रूढ़िवादी हिंदू राजनेताओं के जातीय भेदभाव से लड़ने की इच्छाशक्ति ना होने की आलोचना करने के लियेकिया।
22. शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक सुधारको बढ़ावा देने के लिए बाबा साहब ने
बहिष्कृत हितकारिणी सभा कीस्थापना की।
बहिष्कृत हितकारिणी सभा कीस्थापना की।
23. उन्होंने विचारों के प्रसारप्रसार के लिए मूकनायक, बहिष्कृतभारत, समता, प्रबुद्ध भारत और जनता जैसी पांच पात्र/पत्रिकाएंनिकालीं।
24. 1925 में, साइमन कमीशन मेंआम्बेडकर ने अलग से भविष्य के संवैधानिक सुधारों के लिये सिफारिश लिखकर भेजीं।
25. 1 जनवरी 1818 को अंग्रेजों और मराठों के बीच दूसरे युद्ध कोरेगाँव की लड़ाई के दौरान मारे गये भारतीय महार सैनिकोंके सम्मान में आम्बेडकर ने 1 जनवरी1927 को
कोरेगाँव विजय स्मारक (जयस्तंभ) में एक समारोह आयोजित किया। यहाँ महार समुदाय सेसंबंधित सैनिकों के नाम संगमरमर के एक शिलालेख पर खुदवाये गये तथा कोरेगाँव को अछूतोंके स्वाभिमान का प्रतीक बनाया।
कोरेगाँव विजय स्मारक (जयस्तंभ) में एक समारोह आयोजित किया। यहाँ महार समुदाय सेसंबंधित सैनिकों के नाम संगमरमर के एक शिलालेख पर खुदवाये गये तथा कोरेगाँव को अछूतोंके स्वाभिमान का प्रतीक बनाया।
26. सन 1927 तक,बाबा साहब ने छुआछूत के विरुद्ध एक व्यापक एवंसक्रिय आंदोलन शुरू किया. उन्होंने सार्वजनिक आंदोलनों, सत्याग्रहों और जलूसों के द्वारा, पेयजल के सार्वजनिक स्थान जैसे चावदार तालाब को समाजके सभी वर्गों के लिये खुलवाने के साथ ही अछूतों को भी हिंदू मन्दिरों में प्रवेशकरने का अधिकार दिलाने के लिये संघर्ष किया। 25 दिसंबर 1927को, उन्होंनेहजारों अनुयायियों के नेतृत्व में जाति
भेदभाव और "छुआछूत" को वैचारिक रूप से जस्टिफाई करने वाले , प्राचीन हिंदू पाठ,
मनुस्मृति कीप्रतियों को जलाया।
भेदभाव और "छुआछूत" को वैचारिक रूप से जस्टिफाई करने वाले , प्राचीन हिंदू पाठ,
मनुस्मृति कीप्रतियों को जलाया।
27. लंदन में 8 अगस्त, 1930 कोप्रथम गोलमेज सम्मेलन केदौरान बाबा साहब आम्बेडकर ने अपनी राजनीतिक दृष्टि को दुनिया के सामने रखा
28. 1931 मे लंदन मेंहोने वाले दूसरे गोलमेज सम्मेलन में अछूतों को पृथक निर्वाचिका देने के मुद्दे परब्रिटिश डॉ॰ आम्बेडकर के विचारों से सहमत हुए।
29. 1932 मेंकम्युनल अवार्ड की घोषणा गोलमेज सम्मेलन में हुए विचार विमर्श का ही परिणाम था। इससमझौते के तहत आम्बेडकर द्वारा उठाई गई राजनैतिक प्रतिनिधित्व की मांग को मानतेहुए पृथक निर्वाचिका में दलित वर्ग को दो वोटों का अधिकार प्रदान किया गया। इसकेअंतर्गत एक वोट से दलित अपना प्रतिनिधि चुन सकते थे व दूसरी वोट से सामान्य वर्ग का प्रतिनिधि चुनने की आजादी थी। गांधी जी इस समय पूना की यरवदा जेल में थे। घोषणाहोते ही उन्होंने आमरण अनशन की घोषणा कर दी। गांधीजी कि तबियत बिगड़ने लगी. देश मेंगांधीजी कि जान को बचाने के लिए बढ़ते दबाव को देख बाबा साहब आम्बेडकर 24 सितम्बर 1932
को शाम पांच बजे यरवदा जेल पहुँचे। यहां गांधी और बाबासाहब आम्बेडकर के बीच समझौता हुआ, जोबाद में पूना पैक्ट केनाम से जाना गया। इस समझौते मे बाबा साहब आम्बेडकर ने दलितों को मिले पृथकनिर्वाचन के अधिकार को छोड़ने की घोषणा के बदले में पूना पैक्ट में अवार्ड से मिलीआरक्षित सीटों की संख्या 78
अठत्तर से बढ़ा कर 148 करवा ली। साथ ही अछूत लोगों के लिए प्रत्येक प्रांत मे शिक्षा अनुदान मेपर्याप्त राशि नियत करवाईं और सरकारी नौकरियों से बिना किसी भेदभाव के दलित वर्गके लोगों की भर्ती को सुनिश्चित किया.
को शाम पांच बजे यरवदा जेल पहुँचे। यहां गांधी और बाबासाहब आम्बेडकर के बीच समझौता हुआ, जोबाद में पूना पैक्ट केनाम से जाना गया। इस समझौते मे बाबा साहब आम्बेडकर ने दलितों को मिले पृथकनिर्वाचन के अधिकार को छोड़ने की घोषणा के बदले में पूना पैक्ट में अवार्ड से मिलीआरक्षित सीटों की संख्या 78
अठत्तर से बढ़ा कर 148 करवा ली। साथ ही अछूत लोगों के लिए प्रत्येक प्रांत मे शिक्षा अनुदान मेपर्याप्त राशि नियत करवाईं और सरकारी नौकरियों से बिना किसी भेदभाव के दलित वर्गके लोगों की भर्ती को सुनिश्चित किया.
30. बाबा साहब दिसंबर 1926 से 1936 तक बॉम्बे लेजिस्लेटिव काउंसिल के
सदस्य थे।
सदस्य थे।
31.13 अक्टूबर 1935 को, बाबा साहब आम्बेडकर को सरकारी लॉ कॉलेज का
प्रधानचार्य नियुक्त किया गया और इस पद पर उन्होने दो वर्ष तक कार्य किया।
प्रधानचार्य नियुक्त किया गया और इस पद पर उन्होने दो वर्ष तक कार्य किया।
32. दिल्ली विश्वविद्यालय केरामजस कॉलेज के संस्थापक श्री राय केदारनाथ की मृत्यु के बाद इस कॉलेज के गवर्निंगबॉडी के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
33. बाबा साहब आम्बेडकर बम्बई (अबमुम्बई) में बस गये, उन्होंनेयहाँ 'राजगृह' नाम से एक तीन मंजिला बडे़ घर कानिर्माण कराया, जिसमेंउनके निजी पुस्तकालय में 50,000 सेअधिक पुस्तकें थीं, तबयह एशिया का सबसे बड़ा निजी पुस्तकालय था।
34. 27 मई 1935 को उनकी पत्नी रमाबाई की एक लंबी बीमारी के बाद
मृत्यु हो गई।
मृत्यु हो गई।
35. 1936 में, बाबा साहब आम्बेडकर ने स्वतंत्र लेबरपार्टी की स्थापना की, जो 1937 में केन्द्रीय विधान सभा चुनावोंमे 13 सीटेंजीती। बाबासाहब विधानसभा के सदस्य रहे और इस दौरान उन्होंने बॉम्बे विधान सभा में विपक्ष के
नेता के रूप में भी कार्य किया।
नेता के रूप में भी कार्य किया।
37. 1942 में ऑल इंडिया शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन कीस्थापना बाबा साहब आंबेडकर ने की।
38. वर्ष 1942 से 1946 के दौरान, बाबा साहब रक्षा सलाहकार समिति और वाइसराय की कार्यकारी परिषद में लेबरमिनिस्टर के रूप में सेवारत रहे।
39. 15 अगस्त 1947 मेंआज़ादी के बाद, कांग्रेसके नेतृत्व वाली नई सरकार ने बाबा साहब कोदेश के पहले क़ानून एवं न्यायमंत्री पद के लिए आमंत्रित किया, जिसे बाबा साहब ने स्वीकार कर लिया। 29 अगस्त 1947को, बाबासाहब आम्बेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए बनी संविधान कीमसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। बाबा साहब ने संविधान में आधुनिक और
प्रगतिशील भारत के निर्माण के स्वप्न को शब्दों में पिरोया .
प्रगतिशील भारत के निर्माण के स्वप्न को शब्दों में पिरोया .
40. 15 अप्रैल1948 को नई दिल्ली मेंअपने घर पर दूसरा विवाह किया था। उनकी पत्नी डॉ॰ शारदा कबीर ने शादी के बाद सविता आम्बेडकर नाम अपनाया और उनके बाकी जीवन में उनकी देखभाल की।
42. 14 अक्टूबर1956 को नागपुर शहरमें बाबा साहब ने खुद और उनके समर्थकों के लिए एक औपचारिक सार्वजनिक धर्मांतरणसमारोह का आयोजन किया। सबसे पहले बाबा साहब ने अपनी पत्नी सविता एवं कुछ सहयोगियोंके साथ बौद्ध धर्म ग्रहण
किया। इसके बाद उन्होंने अपने 5,00,000 अनुयायियोको नवयान बौद्ध
धर्म में परिवर्तित किया।
किया। इसके बाद उन्होंने अपने 5,00,000 अनुयायियोको नवयान बौद्ध
धर्म में परिवर्तित किया।
30सितंबर 1956को, बाबासाहब ने "अनुसूचित जाति महासंघ" को खारिज करके "रिपब्लिकन पार्टीऑफ़ इंडिया" की स्थापना की घोषणा की थी, लेकिन
पार्टी के गठन से पहले, 6 दिसंबर1956 कोउनका दिल्ली में निधन हो गया। दिल्ली से विशेष विमान द्वारा उनका पार्थिव शरीर मुंबई मेंउनकेघर राजगृह में लाया गया।
पार्टी के गठन से पहले, 6 दिसंबर1956 कोउनका दिल्ली में निधन हो गया। दिल्ली से विशेष विमान द्वारा उनका पार्थिव शरीर मुंबई मेंउनकेघर राजगृह में लाया गया।
7 दिसंबर को मुंबई में दादर चौपाटीसमुद्र तट पर बौद्ध शैली में अंतिम संस्कार किया गया जिसमें उनके लाखों समर्थकों, कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों ने भाग लिया। उनके अंतिम संस्कार के समय उनकेपार्थिव को साक्षी रखकर उनके 10,00,000 से अधिक अनुयायीओं ने बौद्ध धर्म कीदीक्षा ली थी, क्योकिआम्बेडकर ने 16 दिसंबर1956 को
मुंबई में एक बौद्ध धर्मांतरण कार्यक्रम आयोजित किया था।
मुंबई में एक बौद्ध धर्मांतरण कार्यक्रम आयोजित किया था।
43. बाबा साहब की मृत्यु से संसार केसामाजिक, राजनीतिक पटल पर जो कमी आई वह कभी भरी ना जा सकेगी.
1. बाबा साहब आम्बेडकर की विचारधारा तथा दर्शन को आम्बेडकरवाद" कहते हैं. स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, बौद्ध धर्म, विज्ञानवाद, मानवतावाद, सत्य, अहिंसा, भारतीयसंविधान में निहीत अधिकारों तथा मौलिक हकों की रक्षा करना, तथा जातिमुक्त समाज की रचना, और भारत की प्रगती इसकेमुख्य सिधांत हैं।
बाबासाहब की मृत्य के बाद सारी दुनिया में उनके नाम के स्मारक बनाने और यादगार सभाओं का सिलसिला शुरू हुआ. बाबा साहब की याद में विश्व
भर में कई स्मारक एवं संग्रहालय बनाये गये हैं। कई स्मारक ऐतिहासिक रुप से उनकेजुडे हैं तथा संग्रहालयों में उनकी विभिन्न चीज़ों का संग्रह हैं। हर साल लाखों लौग चैत्यभूमि (मुंबई), दीक्षाभूमि (नागपूर)तथा भीम जन्मभूमि (महू) में उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिएइकट्ठे होते हैं।आजभारत के अलावा दुनिया के 65 से
भर में कई स्मारक एवं संग्रहालय बनाये गये हैं। कई स्मारक ऐतिहासिक रुप से उनकेजुडे हैं तथा संग्रहालयों में उनकी विभिन्न चीज़ों का संग्रह हैं। हर साल लाखों लौग चैत्यभूमि (मुंबई), दीक्षाभूमि (नागपूर)तथा भीम जन्मभूमि (महू) में उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिएइकट्ठे होते हैं।आजभारत के अलावा दुनिया के 65 से
अधिक देशों में आम्बेडकर जयंती मनाई जाती हैं। 2016में, बाबासाहब की 125 वीं
जयंती 102 देशोंमें मनाई गयी.
जयंती 102 देशोंमें मनाई गयी.
2. संयुक्त राष्ट्र संघ मेंभी आम्बेडकर जयंती मनाई गई , संयुक्तराष्ट्र संघ ने उन्हें 'विश्वका प्रणेता' कहांथा
4. राष्ट्रपति भवन केदरबार हॉल/अशोक हॉल में बाबा साहब के 99 वेंजन्मदिवस, 14 अप्रैल1990 को मृत्य केबाद भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से
सम्मानित किया गया था। इस पुरस्कार को उनकीपत्नी सविता आम्बेडकर ने ग्रहण किया.
सम्मानित किया गया था। इस पुरस्कार को उनकीपत्नी सविता आम्बेडकर ने ग्रहण किया.
5. 1990 में एक रुपए का सिक्का जारी किया गया था . बाबा साहब की 125 वीं जयंती के उपलक्ष्य में 10 रुपयेके सिक्के जारीकिए गए थे.
6. 1920 केदशक में, लंदनमें छात्र के रूप में रहने वाले आम्बेडकर जिस मकान में रहे, वह तीन मंजिला घर महाराष्ट्र सरकार द्वारा एकसंग्रहालय में परिवर्तित कर उसे "अंतर्राष्ट्रीय आम्बेडकर मेमोरियल" मेंबदल दिया गया है।
7.
आम्बेडकर भारत के सबसे पूजनीयनेता हैं। उनकी मूर्ति भारत के हर कस्बे, गाँव, शहर, चौराहे, रेलवे स्टेशन और पार्कों में भारी संख्या में लगी.
आम्बेडकर भारत के सबसे पूजनीयनेता हैं। उनकी मूर्ति भारत के हर कस्बे, गाँव, शहर, चौराहे, रेलवे स्टेशन और पार्कों में भारी संख्या में लगी.
बाबासाहब की विचार और कार्य हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे. हमे उनके बताये विचारों को
जीवन में उतरना होगा,.अंतमें बाबा साहब के ही कथन को दोहराउंगीशिक्षितबनो, संगठित हो , संघर्ष करो.
जीवन में उतरना होगा,.अंतमें बाबा साहब के ही कथन को दोहराउंगीशिक्षितबनो, संगठित हो , संघर्ष करो.
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