Tuesday, June 23, 2020

चीनी उत्पादों के बहिष्कारसे क्या समस्या हल हो पायेगी...









क्या छोटी दुकानों में बिक रहा चीनी माल तोड़कर, या chinese
खाने का विरोध   करके चीन कि आर्थिक  कमर तोड़ी जा सकती है . क्या चीन का विरोध सिर्फ
 सोशल मीडिया टाक ही सिमित रहेगा.
या बड़ी  कम्पनिया
विशेषकर टेलिकॉम कम्पनिया चीन के साथ अपना करार तोड़ेगी. आज वैश्वीकरण के इस दौर
में दुनिया के सारे देश एक दुसरे पर निर्भर हैं. कोई भी देश ये नहीं कह सकता कि वो
दुनिया से हटकर आत्मनिर्भर हो सकता हैं.
आइये आंकलन करें भारत चीन आर्थिक सम्बन्धों कि वास्तविकता
क्या हैं .

·        
भारत-चीन
के बीच
2020
के बीच 5 लाख 50 हजार
करोड़ रुपए का कारोबार हुआ
जिसमे  चीन
से
4 लाख 40 हजार
करोड़ का सामान खरीदा गया
·        
थिंक
टैंक गेटवेहाउस के मुताबिक
, यूनिकॉर्न क्लब में शामिल 30 में से 18 स्टार्टअप
में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी हैं.
·        
भारतीय
पुन्जिपत्यों के संघ फिक्की के मुताबिक
45% इलेक्ट्रॉनिक
आइटम और
27%
ऑटो पार्ट्स भी
चीन से आते हैं.


1.   जरूरी
दवाइयों के लिए
65% से ज्यादा
कच्चा माल चीन से आता है


पिछले साल 9 जुलाई को लोकसभा में केमिकल मंत्री डीवी
सदानंद गौड़ा ने बताया था कि भारत जरूरी दवाइयों को बनाने के लिए इस्तेमाल होने
वाले कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है।
2.   देश के टॉप-5 स्मार्टफोन ब्रांड में 4 चीन के

रिसर्च फर्म काउंटरप्वाइंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में जनवरी से मार्च के बीच भारतीय
स्मार्टफोन मार्केट में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी
70% से भी ज्यादा है। देश के टॉप-5 स्मार्टफोन ब्रांड में से 4 चीन के हैं। सबसे ज्यादा 30% मार्केट शेयर श्याओमी का है। दूसरे नंबर
पर
17% मार्केट शेयर के साथ वीवो है। टॉप-5 में सिर्फ सैमसंग ही है, जो दक्षिण कोरियाई कंपनी है।
3.   स्टार्टअप
में भी चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी


चीन का एफडीआई भले ही कम हो, लेकिन वहां
की कई कंपनियों की हिस्सेदारी भारत के स्टार्टअप्स में है।
 थिंक टैंक गेटवे हाउस की रिपोर्ट के
मुताबिक
, यूनिकॉर्न क्लब में शामिल भारत के 30 में से 18 स्टार्टअप
में चीन का पैसा लगा है। चीन की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा
, टिकटॉक बनाने वाली बाइटडांस और टेक कंपनी
टेन्सेंट ही भारत के
92 स्टार्टअप को फंडिंग करती हैं। इनमें
पेटीएम
, फ्लिपकार्ट, बायजू, ओला और ओयो
जैसे स्टार्टअप भी शामिल हैं।

4.   स्मार्टफोन
ही नहीं
, ऐप मार्केट
में भी
40% हिस्सा चीनी
ऐप्स का हैं


भारतीय मार्केट में न सिर्फ चीनी कंपनियों के स्मार्टफोन, बल्कि चीनी ऐप्स भी काफी पॉपुलर हैं। चीन
की कंपनियां सस्ते स्मार्टफोन भारत में लॉन्च करती हैं और भारतीयों को यही पसंद
आते हैं। मार्केट रिसर्च फर्म टेकआर्क के मुताबिक
, दिसंबर 2019 तक भारत में 50 करोड़ से ज्यादा लोग स्मार्टफोन इस्तेमाल
कर रहे
 थे। टिकटॉक, 12 करोड़ से
ज्यादा भारतीय चलाते हैं। कैमस्कैनर ऐप के
 भी भारत में
10 करोड़ से ज्यादा यूजर हैं।
5.   कपड़ों, टीवी में भी चाइनीज माल

इसी साल फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की एक रिपोर्ट
आई थी
, उसके मुताबिक हमारी गाड़ियों में लगने वाले 27% ऑटो पार्ट्स चीन से आते हैं। 45% इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स चीन से आते हैं।
जबकि
, टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और एसी बनाने में यूज होने
वाले
70% कंपोनेंट भी चीन से ही आते हैं। इतना ही
नहीं
, हर साल देश में करीब साढ़े तीन हजार
करोड़ रुपए का सिंथेटिक धागा
, ढाई हजार
करोड़ रुपए का सिंथेटिक कपड़ा और करीब एक हजार करोड़ रुपए के बटन
, जिपर, हैंगर और
निडिल
 जैसे छोटे सामान भी हम चीन से खरीदते
हैं।


No comments:

Post a Comment